#हिंदु-धर्मसंस्कार🚩: भाग १७५ - बुधवार दि. १३.१२.२०२३
🚩🚩 जय श्रीराम 🚩🚩
प्रत्येक धर्म के मुख्य धार्मिक ग्रंथ होते हैं जो धर्माचरण की व्याख्या बनाते हैं।
अन्य धर्मियों का सदा ही यह आक्षेप रहा हैं कि उनके धर्म में एक ही धार्मिक ग्रंथ होता है जो धर्म के तत्व, धार्मिक कर्म व उस धर्म के अनुयायियों का धर्माचरण इसकी व्याख्या करता है।
हमारे सनातन हिंदु धर्म पर यह कहकर उँगली उठाई जाती है कि इसमें देवताओं और धार्मिक ग्रंथों की संख्या इतनी अधिक है कि इसीसे इस धर्म के विचारों में भ्रांति (confusion) स्पष्ट होती है।
वैसे धर्म में संपूर्ण एकता अथवा एक ही विचार अन्य धर्मों में भी नही हैं।
ईसाइयों में Protestants, Catholic यह दो मुख्य पंथ हैं। इसके अतिरिक्त Eastern Orthodox, Anglican, Baptist, Methodist, Moravian, Luthern, Calvinisum आदि के साथ अन्य भी अनेक संप्रदाय पाए जाते हैं।
मुस्लिम धर्म में शिया और सुन्नी यह दो प्रमुख पंथ हैं। इसके अतिरिक्त बोहरा, वहाबी, सलाफी, बरेलवी, सूफी, देवबंदी, अहमदिया आदि पंथ हैं। सुन्नियों में भी हनाफी, मालिकी, शाफई, हंबली आदि संप्रदाय हैं। शिया मुस्लिमों में इन्सा अशरी, जैदिया, इस्माइली शिया, दाऊदी बोहरा, खोजा, नुसैरी आदि संप्रदाय हैं।
ज्यू धर्म में भी Haredi, Dati, Masorti, Hiloni ऐसे भिन्न भिन्न पंथ हैं।
इन सभी धर्मों के भिन्न संप्रदायों में धर्म के कुछ विचार, धर्मगुरु, धर्म की व्याख्याएँ और मान्यताएँ और धर्मनियम इनके भेद है। सभी अपनेआप को अन्य सब से श्रेष्ठ मानते हैं, इसलिए अनेकों बार इन संप्रदायों में आपसी झडपें भी हो जाती हैं।
ऐसे में सनातन हिंदु धर्म पर उंगली उठाने का अधिकार किसे हो सकता है❓
हमने हमारे देवताओं के विभिन्न रूपों पर दि. १४.०६.२०२३ के भाग २१ में विचार किया था।
अब एक से अधिक धर्मग्रंथों के मुद्दे पर क्या कहे !
एक कहानी हैं कि छः अंध व्यक्ति स्पर्श से हाथी का रुप समझने का प्रयत्न करते हैं। जिसने सूँड को हाथ लगाया वह कहता हैं कि हाथी एक अत्यंत मोटी रस्सी समान है, जो हाथी के पैर को छू रहा है उसके लिए हाथी एक खंभेसमान है, जिसने शरीर को नापने का यत्न किया वह हाथी को विशाल बोरे के समान बता रहा हैं, जिसने कान पकडा वह उसे बडे से सूप के समान मान रहा है, जिसने दाँत को हाथ लगाया वह उसे वृत्ताकार बांस के समान बताता है और जिसने पूँछ पकडी उसके लिए तो हाथी के विशाल शरीर की कल्पना भी असंभव है।
तात्पर्य, साधारणतया व्यक्ति की कल्पना उसके अपने अनुभव और समझ तक ही सीमित होती है। इसके परे भी सत्य हो सकता हैं यह मान्य करने के लिए विशाल और उदार मन चाहिए !
इसलिए हम अपने अनेकों धर्मग्रंथों में समाए हुए विशाल ज्ञानसागर का लाभ उठाने का यत्न करेंगे।
गर्व से कहे👇🏼
हिंदु धर्म की जय 🚩
भारतमाता की जय 🇮🇳
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