#हिंदु-धर्मसंस्कार🚩: भाग १७६ - शुक्रवार दि. १५.१२.२०२३
🚩🚩 जय श्रीराम 🚩🚩
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उपासना पद्धति का महत्व : भाग : १
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सनातन हिंदु धर्म में जैसे विविध धर्मग्रंथ हैं वैसेही हमारा धर्म विविध स्त्रोत्र, श्लोक, जापमंत्र आदि से भी समृद्ध है।
अनेक हिंदु अपने दिन का प्रारंभ 'कराग्रे वसते लक्ष्मी....' इस श्लोक से करते हैं, अपने इष्टदेवता का स्मरण कर उनके ध्यानमंत्र का उच्चरण भी किया जाता हैं, जिन लोगो ने गुरुमंत्र लिया हैं वह ईश्वरनाम जपने की साथ अपने श्रीगुरु की मानसपूजा भी करते हैं।
सनातनी हिंदु घरों में दैनंदिन पूजा की जाती हैं। प्राचीन काल में आंगन में रंगोली डालकर तुलसीपूजा करने की पद्धति थी और संध्यासमय तुलसीपूजन के प्रतीक रुप में वहाँपर दीप जलाया जाता था।
आधुनिक काल के अपेक्षाकृत छोटे घर और फ्लैट में भी जहाँतक संभव हो, रंगोली रेखन और तुलसीपूजन किया जाता है।
घर की दैनंदिन पूजा कुटुंब का कोई एक व्यक्ति ही करता हैं किंतु विशिष्ट त्योहार / पर्व के निमित्त अथवा कुलपरंपरा के अनुसार अथवा कुटुंब की इच्छानुसार अन्य विविध पूजाएँ, याग आदि किए जाते हैं।
प्रतिदिन संध्यासमय पूजाघर के सामने बैठकर विविध स्तोत्रों का पठन घर के सदस्यों द्वारा करने की पद्धती भी हैं। इसके अतिरिक्त अनेक व्यक्ती अपने इष्टदेवता के मंत्र का विशिष्ट संख्या में जाप भी करते हैं।
दैनंदिन पूजाविधि में शंख और घंटा की मंगलध्वनि की जाती है। उपर उल्लिखित विभिन्न पूजाविधि, याग इ. में विभिन्न मंत्रों का सामूहिक पठन होता हैं, पूर्णाहुति के समय मंत्रों का उच्चारण उच्च स्वर में किया जाता हैं। स्तोत्र पठन भी विशिष्ट स्वर में किया जाता हैं।
इनमें से प्रत्येक कृति का विशिष्ट अर्थ हैं जिसकी चर्चा हम अगले भाग में करेंगे।
गर्व से कहे👇🏼
हिंदु धर्म की जय 🚩
भारतमाता की जय 🇮🇳
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