#हिंदु-धर्मसंस्कार🚩: भाग १७९ - शुक्रवार दि. २२.१२.२०२३

🚩🚩 जय श्रीराम 🚩🚩 

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 उपासना पद्धति का महत्व : भाग : ४
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सनातन हिंदु धर्म में विविध प्रकार के याग करने का विधान है जैसे गणेशयाग, सप्तशती होम, वास्तुपूजा - मौंजीबंधन - विवाह आदि पूजाओं के भाग के रुप में हवन के साथ ही अन्य भी विविध याग किए जाते हैं।

इनमें मुख्यतः गाय के दूध से बना घी, पायस (दूध व चावल की पवित्र खीर), काले तिल, जौ, समिधा (विविध पवित्र पेडों की  लकडी), नारियल और अन्य सुखे फल, गाय के गोबर के उपले आदि का हवन किया जाता हैं।

इस हवन द्रव्य से वातावरण की शुद्धता होती है। वातावरण में प्रदुषण फैलानेवाले घटक, विभिन्न विषाणु आदि का नाश होता हैं। इनमें सें कुछ सामग्री से वातावरण सुगंधित भी होता है।

प्राचीन काल में अग्निहोत्र की भी पद्धति थी। यह व्रत लेनेवाले व्यक्ति प्रतिदिन सूर्योदय और सूर्यास्त के समय हवन करते थे। इसलिए उनका उपनाम (Surname) 'अग्निहोत्री' पाया जाता है।

आजकल अनेक लोगों का आक्षेप होता हैं कि अग्नि में विविध द्रव्यों का हवन करने से अन्नसामग्री नष्ट होती हैं। अनेक सनातनी हिंदु ऐसे तर्कों के कारण भ्रमित होकर हवन का विरोध करते है।  

परंतु हम सनातनी हिंदुओं को अपने धर्म की परंपराओं का अर्थ समझकर उनका पालन करना चाहिए, ना कि औरों से प्रभावित होकर अपने ही धर्म का विरोध करना चाहिए ! 

जहाँ तक संभव हो विनम्रता से अपने धर्म के अनुसार व्यवहार करते रहना चाहिए किंतु यदि विरोधक आक्रमक हो तो 'शठं प्रति शाठ्यम' यह धोरण अपनाना भी आवश्यक हो सकता है !

उल्लेखनीय बात यह हैं कि मांसाहार करनेवाले मानवों के कारण जिवितहानी होती है, ख्रिश्चन लोग Thanksgiving पर टर्की (मुर्गी समान पक्षी) पकाते हैं, मुस्लिम समुदाय में ना केवल ईद पर बल्कि अन्य भी अनेक अवसरों पर प्राणियों की बलि (कुर्बानी) दी जाती हैं। इन सब के कारण बहुत अधिक जिवितहानी होती हैं। किंतु तब वैसी आलोचना नहीं की जाती है जैसी सनातन हिंदु परंपराओं को लेकर की जाती है। इसलिए आलोचकों के उद्देश को समझना अत्यंत आवश्यक है।

हमें चाहिए की हम धूर्त और स्वार्थी आलोचकों के पथभ्रष्ट करनेवाले विधानों का प्रतिवाद कर अपनी उज्वल परंपराओं पर कायम रहें और उन्हे निर्भिकता से और निश्चयपूर्वक  आगे बढाए।

गर्व से कहे👇🏼 
हिंदु धर्म की जय 🚩 
भारतमाता की जय 🇮🇳

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