#हिंदु-धर्मसंस्कार🚩: भाग १७२ - बुधवार दि . ०६.१२.२०२३
🚩🚩 जय श्रीराम 🚩🚩
हिंदु संस्कृती में स्त्रियों द्वारा जौहार की भी पद्धति थी जो मुख्यतः राजस्थान में पाई जाती थी।
परकी आक्रमण होने पर रजपूत वीर सैनिक राज्यरक्षा और धर्मरक्षा के लिए प्राणों का सर्वोच्च बलिदान तक देने का निश्चय कर किले से / नगर से निकलते थे तब वह स्वयं समाज की सभी स्त्रियों के लिए अतिविशाल चिता बनाते थे। कुटुंब की सभी महिलाएँ अर्थात दादी, माता, बहने, भावज, बेटियाँ आदि सभी चितारोहण करती थी। साधारणतः महारानी / किलेदार की पत्नी प्रथम चितारोहण करती थी और उनके पीछे विवाहित, अविवाहित सभी स्त्रियाँ अपने ईश्वर का स्मरण कर चिता में भस्म होने के लिए आरूढ होती थी।
यद्यपि यह उनका अपना निर्णय होता था परंतु शारिरीक वेदनाओं को वह भी नहीं सह पाती थी। ऐसी स्थितियों में मन को व्याकुल करनेवाला उनका आक्रोश दूर दूर तक सुने जाने के वर्णन इतिहास में पाए जाते हैं।
कभी कभी आक्रमण इतना आकस्मिक होता था की पुरुषों को चिता बनाने तक का अवधि नहीं मिल पाता था। उन्हे तत्काल युद्ध के लिए जाना पडता था। ऐसे में स्त्रियाँ स्वयं चिता बनाने की व्यवस्था कर उसपर आरूढ होकर प्राण त्यागती थी।
इस प्रकार स्त्रियां जब जौहार करती थी तब पुरुषों को यह ज्ञात होता था की युद्ध से जीवित लौटने पर भी उनके लिए स्वागत करनेवाला कोई नहीं है, उनसे प्रेम करनेवाले सभी सदस्य अग्निसात हो चुके हैं। ऐसे में उनके लिए घर लौटने का कोई मोह बाकी नहीं रहता था। वे पूर्ण शक्ती से युद्ध में शत्रु को हराने के लिए वह सर्वस्व दांव पर लगाते थे, प्राणों का सर्वोच्च बलिदान करने से पीछे नहीं हटते थे।
परंतु जौहार यह सनातन हिंदु संस्कृती की मूल परंपरा नहीं हैं। इसका कारण भी देश के बाहर से हुए परकी आक्रमण ही हैं। इन आक्रमकों का स्त्रियों के प्रति दृष्टीकोन दूषित और अन्याय का था। स्त्रियाँ उन के लिए उपभोग की वस्तु से अधिक कुछ नहीं थी इसलिए वह उनके अत्याचारों की शिकार बनती थी। पति - बच्चों से, संपूर्ण कुटुंब से ही बिछुडकर उनका उर्वरित जीवन शारीरीक और मानसिक यातनाओं की यात्रा ही होती थी। ऐसे में अनेक स्त्रियों के लिए जौहार में जलकर मरने का पर्याय अधिक स्वीकार्य होता था। यह सत्य किसी भी प्रकार से हिंदु संस्कृती के लिए लांछनास्पद नहीं हैं, यह तो उन परकी आक्रमकों की ओछी और हीन मनोवृत्ती का निदर्शक हैं !
हमारे सनातन हिंदु धर्म में नारी को पूज्य माना जाता हैं, देवता के रुप में स्त्री की पूजा होती हैं, ब्रह्मवादिनी गार्गी, मैत्रेयी और लोपामुद्रा द्वारा रचित ऋचाओं का स्थान वेदों में है। सनातन हिंदु धर्म नारी का सम्मान करता है। हिंदु धर्म को माननेवाले व्यक्ती द्वारा किए गए अत्याचार उस व्यक्ति की मानसिकता की ओर इंगित करते हैं, ना कि धर्मतत्वों में न्यायपूर्णता के अभाव को !
हमें चाहिए की हम इस तथ्य को समझें और अपनी गौरवशाली परंपरा पर गर्व करें।
गर्व से कहे👇🏼
हिंदु धर्म की जय 🚩
भारतमाता की जय 🇮🇳
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