#हिंदु-धर्मसंस्कार🚩: भाग १८४ - बुधवार दि. ०३.०१.२०२४

🚩🚩 जय श्रीराम 🚩🚩 

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 उपासना पद्धति का महत्व : भाग : ९
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हमारे धर्म में विविध पर्व के निमित्त गंगास्नान और यदि वह संभव ना हो तो अन्य नदी में स्नान की पद्धति है।
स्थान के पश्चात नदी के किनारे पर स्थित मंदिरों में देवता की पूजा - अर्चना - प्रदक्षिणा भी की जाती है।

नदी में स्नान व उसके पश्चात पूजा यह एक प्रकार से सामुदायिक उपासना है। विशिष्ट श्रध्दायुक्त उद्देश से नदी पर एकत्रित होना, विशिष्ट क्रम से धर्मकार्य करना इससे मानवसमूह में एकता की भावना निर्माण हो सकती है ! 
सभी के एक ही धर्मरज्जू से बंधे होने की अनुभूति एकता की भावना को दृढ बनाने में सहायक हो सकती है !

जैसे ख्रिश्चन धर्म में चर्च में सामूहिक प्रार्थना (Mass) होती हैं, मुस्लिम धर्म में पुरुष मस्जिद में सामूहिक रुप से नमाज पढते हैं।

इससे स्पष्ट होता है कि सामूहिक उपासना का महत्व विश्व के प्रमुख धर्मो में पहचाना गया है और विशिष्ट धार्मिक मान्यता रखनेवाले समूहों को एकसाथ बाँधे रखने के लिए, उनमें विशिष्ट श्रद्धाओं का रोपण व संवर्धन करने के लिए और विशिष्ट धेय्य की पूर्ति के लिए उन्हे प्रेरित करने के लिए प्रार्थना - उपासना के व्याज से एकत्रित करना यह पद्धति सर्वमान्य है।

इतिहास बताता हैं कि सामूहिक उपासना के अभाव में मनुष्यों के धर्मच्युत होने की संभावनाएँ पाई गई और सामाजिक दुष्परिणाम भी देखे गए। 
ऐसी स्थिति में दूरदर्शी संत - महात्माओंने और समाजसेवकों ने ऐसे सुयोग निर्माण किए जिससे सामूहिक पूजा - अर्चना के माध्यम से समाज के विविध स्तर के लोगों का एकत्रीकरण हो सके। 
ऐसी पहल के कारण आपस के मतभेदों पर चर्चा हो सकती है, मनमुटाव धीरे धीरे कम हो सकता है। परिणामतः मनुष्यों की उर्जा समाजहित व देशहित की ओर प्रवाहित करने की प्रक्रिया गतिमान हो सकती है। 

उदाहरण के लिए, महाराष्ट्र में १७ वे शतक में समर्थ रामदासस्वामी इन्होने सामूहिक आरती को बढावा दिया। इसके लिए उन्होने अनेक देवताओं की आरतीयों की रचना की। उनका उद्देश था परकी आक्रमणों से ग्रस्त समाज में तेज जागृत करना! 

ठीक इसी प्रकार अंग्रेजों के शासनकाल में लोकमान्य टिलकजी ने सामूहिक गणेशस्थापना व पूजा का प्रारंभ किया। उन्होने दस दिनों के उत्सव में व्याख्यान, नाटक आदि के माध्यम से परकी सत्ता के विरुद्ध आंदोलन करने के विचारों का प्रसार किया। 

तात्पर्य, सामूहिक उपासना ना केवल धार्मिक बल्कि सामाजिक व राष्ट्रीय हित का भी वर्धन करती हैं। 

सामूहिक उपासना के विविध अंगों पर हम और विचार करेंगे।

गर्व से कहे👇🏼 
हिंदु धर्म की जय 🚩 
भारतमाता की जय 🇮🇳

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