#हिंदु-धर्मसंस्कार🚩: भाग १९० - बुधवार दि. १७.०१.२०२४
🚩🚩 जय श्रीराम 🚩🚩
भारत से स्थलांतरित हुए रोमानियों को दीर्घ काल तक 'जिप्सी' भी कहा जाता रहा क्योंकि उनके विषय में धारणा थी की पूर्व में वह इजिप्त के निवासी थे।
यद्यपि एक ही स्थान पर निवास करने के बजाय घूमते रहनेवाले सभी समुदायों के लिए 'जिप्सी' यह सामान्य संज्ञा है किंतु वास्तव में यह शब्द अब अपमानजनक माना जाता है।
कमसे कम भारत से स्थलांतरित हुए समुदायों के लिए अब 'रोमानी' यह संज्ञा ही प्रचलित है।
उल्लेखनीय तथ्य है कि प्रत्येक देश में यह समुदाय उपेक्षणीय, तिरस्कृत, समाजबहिकृत और अवांछित ही था जो स्थिति अब भी अमूमन कायम हैं !
ऐसे समुदाय के इतिहास जानने का कष्ट भी कौन करे !
इसलिए विश्व के प्रगत और तथाकथित सभ्य / सन्माननीय समाज के समान रोमानियों को उनके इतिहास और संस्कृति के अध्ययन का सौभाग्य प्राप्त नहीं हुआ था।
अठारवीं सदी में इनके विषय में अधिक जानकारी प्राप्त करने की जिज्ञासा कुछ अभ्यासकों में जागृत हुई।
रोमानियों की रहनसहन की पद्धति, उनके वस्त्र - गहने, सामाजिक ढांचा, भाषा, परंपराएँ इत्यादी उनका मूल भारत में होने के प्रमाण देने लगे। विज्ञान की प्रगति के साथ अनुवांशिक अध्ययन (Genetic study) किया जाने लगा और अधिकतर अभ्यासकों ने माना की सदियों पहले रोमानियों का निवास भारत के राजस्थान में हुआ करता था !
भारत से उनका स्थलांतर पूर्णतः एक ही समय नहीं हुआ था। अनेक सदियों तक थोडे थोडे अंतराल में सामूहिक स्थलांतर होता रहा। सामान्यतः वह अफगाणिस्तान, पर्शिया (इराण) होते हुए आर्मेनिया पँहुचे। उनके कुछ छोटे - बडे समूहों ने इस मार्ग के बीच आनेवाले प्रदेशों में भी दीर्घ काल तक निवास किया।
किंतु आर्मेनिया में रोमानी सुदीर्घ काल तक रहे थे ऐसा माना जाता है क्योंकि उनकी भाषा में आर्मेनिया की स्थानिक भाषा के बहुसंख्य शब्द पाए जाते है।
परंतु अनेक सदियों तक मूल देश भारत से दूर दूर जाते रहने की प्रक्रिया में रोमानियों में अब भारतीयता और हिंदुत्व के तत्व नहीं रह पाए हैं। इस काल में ना केवल उनकी भाषा, वस्त्र और आहार बदल गया, बल्कि उनका धर्मपरिवर्तन भी हुआ। इस अशिक्षित समुदाय को भारत में रहते हुए भी हिंदु धर्मशास्त्रों का ज्ञान नहीं ही था, ना वह अपने धर्म का व्यापक और उदार रूप जानते थे, इसलिए उनमें धर्म के प्रति कट्टरता और आस्था कदाचित कम ही रही होगी। इसलिए स्थलांतर के मार्ग में जहाँ उनका दीर्घ काल तक निवास हुआ था वहाँ का प्रचलित धर्म वह स्वाभाविक रूप से अपनाते गए।
परिणामतः रोमानी समाज अब मुख्यतः ख्रिश्चन है अथवा मुस्लिम !
युरोप के अनेक देशों में बिखरते समय प्रमुखतः उन्होने पूर्व युरोप की दिशा पकडी जो आधुनिक बल्गेरिया, रोमानिया और सर्बिया हैं।
इन देशों में रोमानियों की संख्या लक्षणीय हैं किंतु वास्तव में वह विश्व के ३० देशों में बसे हुए हैं !
इन सब देशों में रोमानियों का कैसा स्वागत हुआ, स्थानिक राज्यकर्ता व नागरिकों ने उनके साथ कैसा व्यवहार किया और कर रहें हैं यह मात्र अभ्यास का नहीं, चिंता का विषय है। साथ ही दूसरे देशों में परधर्मी अतिथियों के साथ हुआ व्यवहार 'अतिथि देवो भव' यह संस्कार करनेवाली सनातनी हिंदु संस्कृति को उच्चासन प्रदान करने का कारण भी है !
इसलिए अगले भाग में हम इसपर और गहराई से विचार करेंगे।
गर्व से कहे👇🏼
हिंदु धर्म की जय 🚩
भारतमाता की जय 🇮🇳
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