#हिंदु-धर्मसंस्कार🚩: भाग १९२ - सोमवार दि. २२.०१.२०२४

🚩🚩 जय श्रीराम 🚩🚩

हिंदु धर्मसंस्कार की श्रृंखला में आज सर्वाधिक महत्वपूर्ण दिन हैं !
शतकों की प्रतिक्षा के पश्चात अयोध्या में भगवान श्रीराम अपने भवन में विराजमान हो रहे हैं।

यह प्रतीक्षा मात्र सुदीर्घ नहीं थी, अपमान की चरमसीमा थी ! हमारे देवी - देवता हमारी पुण्यभूमी - धर्मभूमी में हाशिए पर धकेले गए थे और सनातनी हिंदुओं का विस्मृत आत्मसम्मान, धर्माभिमान और शौर्य के कारण इतिहास के पृष्ठ रक्तरंजित और लज्जित बन गए थे।

किंतु श्रीमद् भगवद्गीता के वचन ही यह हैं -

यदा यदा हि धर्मस्य ग्लानिर्भवति भारत । 
अभ्युथानमधर्मस्य तदात्मानं सृजाम्यहम् ॥ 

और 

परित्राणाय साधुनाम् विनाशाय च दृष्कृताम्।
धर्मसंस्थापनार्थाय संभवामि युगे युगे ॥

प्रभु ने अपने वचन सार्थ किए हैं !

अयोध्या के अनाम कारसेवक,  श्रीराम के नाम पर सर्वोच बलिदान देनेवाले हुतात्मा भक्त, न्यायालय में  विजय के लिए पूर्ण शक्ति से प्रयत्न करनेवाले श्रद्धालु न्यायविद् और उनके सहकारी, रामजन्मभूमि की रक्षा के लिए अयोध्या के भीतर और बाहर से भी प्रत्येक प्रयत्न करनेवाले प्रभुसेवक और ऐसे ही अनेक अनामिकों के सहयोग से इस वर्ष का प्रारंभ ही दीपावली मनाकर करने का सौभाग्य हमें प्राप्त हुआ हैं।

शतकों तक की घुटन और लांछना के पश्चात आज के इस अभूतपूर्व पवित्र पर्व पर श्रीराम के चरणों में यह काव्य पुष्प श्रद्धापूर्वक अर्पण -

(१) रामप्रभु की रणनीति
 
क्रूर प्रतिक्षा शतकों की थी 
तप करती थी अवधपुरी
रिक्त सिंहासन सूनी नगरी
राम बिना हर आँख भरी

हाय ! प्राण बिन देह पडा हो
ऐसी दुर्दशा नगरी की
'प्रभु प्रभु' कह रोज बिलखती 
अभागीन वह व्याकुल थी

अपने झूलाघर में सिमटे
रामलला जैसेतसे
भक्तों की आहट को तरसे
पलपल वो घुटते रहते 

पर कोमल तो वे भक्तों के हैं
दुष्टों के वो वधिक रहे
क्षमा अपेक्षा मत करना जब
निरपराध तुम खेत रहे

दीर्घ प्रतिक्षा करवाई पर
सफल हुई हैं रामनिति !
'मंदिर मंदिर' कहते कहते
हिंदु चेतना जाग उठी !

(शब्दार्थ :
खेत रहना = हुतात्मा होना , रणभूमि में मृत्यु )
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(२) एक अनोखी दीपावली

मंदिर बनता रामलला का 
रोमांचित जनमानस हैं !
रामलला की प्राणप्रतिष्ठा 
मन को देती ढाढस हैं ! 

पुलकित शोभित धर्म सनातन
प्रभुदर्शन का भाव जगा !
सदियों रिसते घावों पर अब 
शीतल चंदन लेप लगा !

आस्था-श्रद्धा-भक्ति-समर्पण, 
शब्दों का नव अर्थ गढा ! 
केवल मंदिर ना कहना ! 
नव उर्जा का नव पर्व बना !
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🚩जय जय श्रीराम🚩
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गर्व से कहे👇🏼 
हिंदु धर्म की जय 🚩 
भारतमाता की जय 🇮🇳

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