#हिंदु-धर्मसंस्कार🚩: भाग १९५ - सोमवार दि. २९.०१.२०२४

🚩🚩 जय श्रीराम 🚩🚩 

'आधुनिकता' यह आजकल अत्यंत लोकप्रिय कल्पना है।
घर आधुनिक ..
वस्त्र आधुनिक ..
आहार आधुनिक ..
मनोरंजन में आधुनिकता ..
अतिथिसत्कार में आधुनिकता ..

जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में आधुनिक बने रहना जैसे अपरिहार्यता ही बन गयी हैं।

वैसे कालानुरूप परिवर्तन सचमुच आवश्यक है !
परंपराओं का जतन करने के लिए धोती कुर्ता अथवा नौ गज की साडी पहनना अब संभव नहीं हैं..
बच्चों को पाठशाला / Tuition Classes के लिए अथवा बडों को नौकरी/ व्यवसाय के लिए छ: / साडे छः बजे या अनेकों बार इससे भी पहले घर से निकलना होता है। ऐसे में प्राचीन काल के समान स्नान करके ही खाना बनाना संभव नहीं है...
पुरातन काल समान अतिथियों के लिए प्रत्येक समय षड् रस भोजन बनाना अथवा प्रत्येक समय सगे - संबंधी - मित्र आदि सबको खाने के लिए घर पर न्योतना संभव नहीं हैं...

इसलिए आधुनिकता को स्वीकार करना अनिवार्यता बन ही गई है !
किंतु आधुनिकता अंगिकार करने में 'विवेक' अत्यावश्यक है और धर्मपालन और धर्माचरण को आधुनिक जीवनशैली में ढालने के लिए तो विवेक अनिवार्य है !

पिछले भाग में हमने विश्व के अन्य प्रमुख धर्मिय आधुनिक काल में भी धर्माचरण संबधी कैसे विचार रखते हैं और किन परंपराओं का पालन करते हैं यह देखा था। और इसी के संदर्भ में हमने 'विद्यार्थी' यह संकल्पना रखी थी।

यद्यपि हमारा धर्म अपनेआप में वैशिष्ट्यपूर्ण हैं, श्रेष्ठ है किंतु हम सनातनी हिंदु अन्य धर्मियो की धार्मिक आस्था और धर्मपालन की पद्धति से यदि कुछ सीख सकते हैं तो यह हमारे ही हित में होगा !

हमें तथाकथित आधुनिक कुटुंबों की पद्धति को देखकर विचार करना होगा कहीं हम सनातनी हिंदु अपने धर्म के प्रति दायित्व को अनदेखा करने की भूल तो नहीं कर रहे हैं ?

यदि इसका उत्तर 'हाँ' है तो हमें उन गलतियों को सुधारने का प्रयत्न करना चाहिए। क्योंकि गलती अनजाने में हुई हो तो सुधार की संभावना होती हैं इसलिए क्षमा भी संभव हैं। परंतु ठीठ बनकर गलती को अपनी विचारधारा ही बना लेंगे तो आनेवाली पिढीयों के, भविष्य के अपराधी कहलाएंगे हम ❗

इसलिए अगले भाग से हम अपनी कमियों पर विचार करेंगे। आधुनिक जीवन की विविध मर्यादाओं और अपरिहार्यताओं के साथ भी उनमें सुधार कैसे किया जा सकता इसपर भी विचार करेंगे। 
यह सब ना करने पर भविष्य में क्या चित्र होगा यह भी देखेंगे❗

दर्पण में देखते रहना आवश्यक इसलिए हैं कि वह हमें बदलते वर्तमान का चित्र दिखाता है जिससे समय रहते ही भविष्य के लिए उपाय किए जा सकते हैं ❗

गर्व से कहे👇🏼 
हिंदु धर्म की जय 🚩 
भारतमाता की जय 🇮🇳

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