#हिंदु-धर्मसंस्कार🚩: भाग १८६ - सोमवार दि. ०८.०१.२०२४
🚩🚩 जय श्रीराम 🚩🚩
सहिष्णुता यह सनातनी हिंदुओं का विशेष गुण है। हम अपना धर्म, परंपरा, सभ्यता और संस्कृति के प्रति आदर, अभिमान और श्रद्धा की भावना रखते है और हरसंभव धर्माचरण भी करते हैं।
परंतु साधारणतः हिंदुओ में धर्म के प्रति कट्टरता नहीं पायी जाती हैं। अपने धर्म का पालन करने का अर्थ हमारे लिए ना तो दूसरें धर्मो को कुचलना अथवा नष्ट करना है और ना ही अपने धर्म का आक्रमकता से प्रसार करना है!
हम मानते हैं कि सभी के अपने अपने श्रद्धा विषय हो सकते है और इस संबध में स्वतंत्रता यही प्रगल्भ मानव समाज का परिचय हैं!
प्रसंग आनेपर भारत ने प्रत्यक्ष जीवन में भी अपनी इस उदार विचारधारा के आदर्श प्रस्तुत किए हैं !
उदाहरण के लिए जब इस देश में ज्यू और पारसी धर्मीय लोग स्थलांतरित होकर आए थे तब उन्हे इस देश के समाज ने उदारतापूर्वक अपनाया था।
वैसे मानवसमाज में सामूहिक स्थानांतरण दुर्लभ बात नहीं है। मानवी उत्क्रांती की प्रक्रिया के आरंभिक काल में मानव घूमते ही रहे होंगे। इसके पश्चात विविध सभ्यताओं के विकासकाल में भी मानव समूहों का स्थलांतर होता रहा हैं।
परंतु इसवी सदी के प्रारंभ समय तक मानव समाज पर्याप्त रुप में स्थिर हो गया था। इसके पश्चात हुए सामूहिक स्थलांतरण के कारण साधारणतः मूल भूमि में वास्तव्य के लिए प्रतिकूल परिस्थिति उत्पन्न होना था अथवा अन्य किसी प्रदेश पर विजय प्राप्त कर वहाँ पर विजेता के रुप में बसने का था अथवा उन्नति की आकांक्षा से स्थलांतर करना था।
हमारे देश में सभी प्रकार के स्थलांतरितों के उदाहरण हैं। भारत देश में बाहर से आकर बसे स्थलांतरित भी हैं और इस देश से दूसरे प्रदेशों में सामूहिक स्थलांतरण भी हुआ है।
दूर देश से विनम्रतापूर्वक आए परधर्मियों को आश्रय देने और अपनाने के उदाहरण सनातनी हिंदुओं की सहृदयता का परिचय देते हैं। दूसरी ओर इस देश से स्थलांतरित हुए समूहों के साथ विश्व के विभिन्न देशों में हुआ व्यवहार भी सनातनी हिंदुओं के उदार दृष्टीकोण पर ही प्रकाश डालता है ! इसलिए इस विषय के विभिन्न तथ्यों को विस्तारपूर्वक समझना आवश्यक है।
हम कल से इसका प्रारंभ करेंगे। प्रथम हम भारत देश में अतिथि बन कर आए ज्यू और पारसी समुदायों पर विचार करेंगे और उसके पश्चात भारत से स्थलांतरित हुए रोमनियों का इतिहास और उनकी वर्तमान स्थिति की भी चर्चा करेंगे।
गर्व से कहे👇🏼
हिंदु धर्म की जय 🚩
भारतमाता की जय 🇮🇳
टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें