#हिंदु-धर्मसंस्कार🚩: भाग २०० - शुक्रवार दि.०९.०२.२०२४
🚩🚩 जय श्रीराम 🚩🚩
अपने धर्म की अच्छाइयों से यदि हम अपनी अगली पिढी को परिचित नहीं कराएंगे तो परिणाम कितने भीषण होते हैं इसपर यदि हम ध्यान दे तो भविष्य का चित्र धूमिल अथवा निराशादायी प्रतीत होता है।
आजकल की बाल, किशोर और युवा पिढी के संदर्भ में सनातन हिंदु धर्म के प्रति अज्ञान और उदासीनता के कारण हम यह स्थिति देख रहें हैं -
* उन्हे सामान्य और सरल धार्मिक परंपराओं की भी जानकारी नहीं होती हैं अथवा उसका महत्व वह नहीं मानते है जैसे भोजन से पूर्व ईश्वर का नाम लेकर अन्न को प्रसाद स्वरूप ग्रहण करना !
* माथे पर (स्त्री पुरुष दोनों द्वारा ) तिलक धारण करने का महत्व !
* यज्ञोपवित (जनेऊ) धारण करने का महत्व !
* स्नान के समय गंगास्नान की पवित्र भावना से 'गंगे च यमुने चैव.... ' इस श्लोक का उच्चारण करना !
* संध्यासमय पूजाघर में और तुलसी के सामने दिया जलाकर श्लोक पठन करने का कारण !
* हिंदु धर्म में बताए गए सोलह संस्कारोंका (नामकरण से अंत्येष्टी तक ) औचित्य और महत्व !
यानि संपूर्णतः तर्कशुद्ध, विज्ञान पर आधारित ज्ञान का भंडार हमारे पास हैं परंतु हम ही आँख मूंदकर बैठे हैं।
परंतु समाज का भविष्य बनाना तो हमारे हाथ में हैं!
और इस हेतू की पूर्णता के लिए हिंदुत्व निष्ठा, हिंदु धर्माधिष्ठित आचरण और हिंदु संस्कृती के प्रति आत्मीयता और प्रतिबद्धता यह भाव आवश्यक हैं!
हम अपनी शक्तिनुसार इसमें योगदान तो दे ही सकते हैं 🙏🏼 !
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देखते ही देखते 'हिंदु धर्मसंस्कार' इस श्रृंखला के २०० अध्याय पूर्ण हुए हैं। इसमें सहभागिता व प्रोत्साहन के लिए आपका धन्यवाद !
अब अल्पविराम का समय है !
इसलिए 'हिंदु धर्मसंस्कार - अध्याय १' का हम समापन करते हैं ।
यथासमय अध्याय २ के माध्यम से पुनः यात्रा प्रारंभ करेंगे ।
तबतक 'हिंदु धर्मसंस्कार' इस कल्पना से जुडी आपकी सूचनाएँ और सुझाव आमंत्रित हैं🙏🏼
गर्व से कहे👇🏼
हिंदु धर्म की जय 🚩
भारतमाता की जय 🇮🇳
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