हिंदु धर्मसंस्कार 🚩 : भाग २०४

जय श्रीराम 🚩🚩

🕉️श्री परमात्मने नमः
श्रीमद्भगवद्गीता : अध्याय १ 

अत्र शूरा महेष्वासा भीमार्जुनसमा युधि ।
युयुधानो विराटश्च द्रुपदश्च महारथ : ॥४॥
धृष्टकेतुश्चेकितानः काशिराजश्च वीर्यवान।
पुरुजित्कुन्तिभोजश्च शैब्यश्च नरपुङ्गवः ॥५॥
युधामन्युश्च विक्रान्त उत्तमौजाश्च वीर्यवान ।
सौभद्रो द्रौपदेयाश्च सर्व एव महारथाः ॥६॥
...........

गीता के प्रथम अध्याय को 'अर्जुनविषादयोग' कहा जाता है क्योंकि कुरुक्षेत्र में कौरवपक्ष के अग्रणीयों में अपने सगे - संबंधी गुरुजनों को देखकर अर्जुन का मन विषाद से भर जाता है और इन सबसे युद्ध कर राज्य प्राप्त करने का विचार उन्हे स्वार्थपूर्ण लगने लगता है। 
योगेश्वर श्रीकृष्ण उनकी इस भ्रांति को जिस उपदेश से दूर करते है उसे भगवद्गीता कहा गया है।

इसके अतिरिक्त इस अध्याय को 'सैन्यदर्शन' भी कहा जाता है क्योंकि इस अध्याय में दुर्योधन द्वारा दोनों पक्षों के योद्धाओं का वर्णन है। 
इसी अध्याय  में कौरवसेना का दर्शन करने पर अर्जुन ने उसमें क्या देखा इसका भी वर्णन है ।
श्लोक ४ से ६ तक दुर्योधन द्रोणाचार्य को पाण्डवपक्ष के योद्धाओं के विषय में बताता है।

इन योद्धाओं में विविध राज्यों के शासक है, पाण्डवों के हितैषी (well-wishers) है और कुछ ऐसे भी होंगे जिन्हे दुर्योधन ने कभी दमित (oppress) किया हो !

दुर्योधन बता रहा हैं कि पाण्डवसेना में भीम और  शूर धनुर्धर है, महारथी  द्रुपद और राजा विराट के साथ सात्यकी भी है।
धृष्टकेतु और शूर काश्य और चेकितान है।
पुरुजित् है, कुंन्तिभोज( कुन्ति के दत्तक पिता ) व शैब्य है ।
वीर उत्तमौजा के साथ विक्रमी  युधामन्यु भी है ।

वह आगे बता रहा है कि पाण्डवसेना में सुभद्रापुत्र अभिमन्यू और द्रौपदी के महारथी पुत्र है। 
यह पाँच द्रौपदेय निम्नानुसार है -
🔸युधिष्ठिरपुत्र - प्रतिविन्ध्य
🔸भीमपुत्र - सुतसोम
🔸अर्जुनपुत्र - श्रुतकर्मा 
🔸 नकुलपुत्र - शतानिक
🔸 सहदेवपुत्र - श्रुतसेन

इन पाँच द्रौपदेयों को उपपाण्डव कहा जाता है किंतु महाभारत में उनका बहुत कम वर्णन है।
पाण्डवों के वनवास और अज्ञातवास काल में पाँचो द्रौपदीपुत्र अपने ननिहाल में अर्थात पांचालराज द्रुपद के घर रहे है। 
पाण्डव और विशेषकर श्रीकृष्ण जानते थे की भविष्य में युद्ध होकर रहेगा। इसलिए इन तेरह वर्षों में पाण्डवपुत्रों को युद्धकला का शिक्षण दिया गया। 
द्रौपदी के पुत्रों को द्रौपदी के भाई धृष्टद्युम्न व शिखंडी ने प्रशिक्षित किया था। 
अभिमन्यू की शिक्षा का दायित्व उनके मामा श्रीकृष्ण और उनकी युद्धकलाकुशल माता सुभद्रा ने लिया था।

दुर्योधन जैसा अहंकारी व्यक्ती भी इन सब पाण्डवपुत्रों को 'महारथी' कह रहा है जिससे स्पष्ट है कि इन सबके ननिहाल में उन्हे किस उच्च कोटी की शिक्षा दी गई होगी !
पांडवों की अन्य पत्नियां (जो इंद्रप्रस्थ में उनके साथ रहती थीं) १३ वर्षों के इस काल में अपने बेटों के साथ अपने अपने मायके में  रहीं जहां उनके पुत्रों को युद्ध के लिए प्रशिक्षित किया गया था। 
उनकी जानकारी इस प्रकार है - 
🔸 युधिष्ठिर की पत्नी देविका राजा शिबि की पुत्री थी - पुत्र यौद्धेय 
🔸 भीम की पत्नी काशी की राजकन्या बलंधरा - पुत्र सर्वग 
🔸 नकुल की पत्नी करेणुमति चेदि देश की राजकन्या और शिशुपाल की पुत्री भी- पुत्र सुहोत्र 
🔸 सहदेव की पत्नी विजया राजा द्युतिमान की पुत्री थी- पुत्र निरमित्र
इनका उल्लेख भगवद्गीता में नहीं किया गया है, यह जानकारी महाभारत से मिलती है ।
.........
क्रमशः
.........

टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

हिंदु धर्मसंस्कार 🚩 : भाग २१३

हिंदु धर्मसंस्कार 🚩 : भाग २४८

हिंदु धर्मसंस्कार 🚩: भाग २०२